IVF असफल होनेका कारण क्या है? जानि ए 7 संभावित कारण

जब IVF सफल नहीं होता, तो सबसे पहला सवाल मन में यही आता है – “आखिर ऐसा क्यों हुआ?” यह सवाल हर कपल के लिए स्वाभाविक है। IVF एक उम्मीद भरी प्रक्रिया होती है, इसलिए उसका असफल होना भावनात्मक रूप से कठिन लग सकता है। लेकिन सही कारण समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे अगली IVF साइकल की बेहतर तैयारी की जा सकती है।

IVF फेल होने का मतलब क्या होता है?

IVF प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। किसी भी स्टेप में समस्या आने पर परिणाम प्रभावित हो सकता है। कई बार एग्स सही तरह विकसित नहीं होते, कभी एम्ब्रियो बनने के बाद गर्भाशय में इम्प्लांट नहीं हो पाता, और कभी एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव आता है। इन सभी स्थितियों को IVF फेल होना माना जाता है।

पहली IVF साइकल में सफलता दर लगभग 35 – 40% के बीच होती है। यानी हर कपल को पहली कोशिश में सफलता मिले, यह जरूरी नहीं है। सही जांच और सही इलाज के साथ आगे की साइकल्स में सफलता की संभावना बढ़ सकती है।

1. एम्ब्रियो की क्वालिटी कमजोर होना

IVF फेल होने का सबसे सामान्य कारण एम्ब्रियो की गुणवत्ता होती है। कई बार एम्ब्रियो बाहर से स्वस्थ दिखता है, लेकिन उसके क्रोमोसोम्स में असामान्यता हो सकती है। ऐसे एम्ब्रियो गर्भाशय में टिक नहीं पाते या शुरुआती दिनों में उनकी ग्रोथ रुक जाती है।

35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ एग्स की क्वालिटी प्रभावित होती है। बार-बार IVF फेल होने पर डॉक्टर PGT (Preimplantation Genetic Testing) की सलाह दे सकते हैं ताकि स्वस्थ एम्ब्रियो चुना जा सके।

2. गर्भाशय की सही तैयारी न होना

अगर गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम सही स्थिति में नहीं है, तो स्वस्थ एम्ब्रियो भी इम्प्लांट नहीं हो पाता। एंडोमेट्रियम की मोटाई, ब्लड फ्लो और हार्मोनल बैलेंस IVF सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुछ महिलाओं में फाइब्रॉइड, पॉलिप या यूट्रस के अंदर चिपकन जैसी समस्याएं भी इम्प्लांटेशन में रुकावट बन सकती हैं। कई मामलों में ERA टेस्ट की मदद से सही इम्प्लांटेशन विंडो का पता लगाया जाता है।

3. एग और स्पर्म की खराब हेल्थ

IVF की सफलता सीधे तौर पर एग्स और स्पर्म की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। अगर पर्याप्त संख्या में मैच्योर एग्स नहीं बनते या स्पर्म कमजोर होते हैं, तो स्वस्थ एम्ब्रियो बनने की संभावना कम हो जाती है।

स्पर्म की कम मोटिलिटी, कम काउंट या DNA fragmentation जैसी समस्याएं भी IVF रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार सामान्य रिपोर्ट होने के बावजूद गहराई से जांच करने पर समस्या सामने आती है।

4. उम्र का प्रभाव

महिलाओं की बढ़ती उम्र IVF सफलता पर सबसे अधिक असर डालती है। 30 वर्ष से कम उम्र में सफलता दर अधिक रहती है, जबकि 40 वर्ष के बाद यह काफी कम हो सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ एग्स की संख्या और गुणवत्ता दोनों घटती हैं। पुरुषों में भी उम्र के साथ स्पर्म क्वालिटी प्रभावित हो सकती है, हालांकि इसका असर महिलाओं की तुलना में कम होता है।

5. शरीर के अंदर की छुपी समस्याएं

कुछ मेडिकल कंडीशंस ऐसी होती हैं जो सामान्य जांच में तुरंत सामने नहीं आतीं, लेकिन IVF रिजल्ट पर गहरा असर डाल सकती हैं।

  • हाइड्रोसैल्पिंक्स (फैलोपियन ट्यूब में पानी भरना)
  • थायरॉइड असंतुलन
  • ऑटोइम्यून डिसऑर्डर
  • PCOS
  • अनकंट्रोल्ड डायबिटीज

इन स्थितियों का सही समय पर इलाज IVF की सफलता के चांस बढ़ा सकता है।

6. लाइफस्टाइल से जुड़ी गलतियां

कुछ आदतें IVF प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। स्मोकिंग, अल्कोहल, अत्यधिक कैफीन, नींद की कमी और अनियमित जीवनशैली हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकती हैं।

बहुत ज्यादा या बहुत कम वजन भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। IVF के दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और हेल्दी रूटीन अपनाना जरूरी होता है।

7. तनाव और मानसिक दबाव

IVF शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। लगातार दवाइयां, टेस्ट और रिजल्ट का इंतजार तनाव बढ़ा सकते हैं। ज्यादा स्ट्रेस शरीर में हार्मोनल बदलाव पैदा कर सकता है, जो इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि तनाव अकेले IVF फेल होने का कारण नहीं होता, लेकिन यह अन्य समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसलिए इस दौरान परिवार और पार्टनर का सहयोग बहुत जरूरी होता है।

निष्कर्ष

IVF फेल होने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। एम्ब्रियो की गुणवत्ता, गर्भाशय की स्थिति, उम्र, हार्मोनल समस्याएं, लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य – ये सभी मिलकर IVF के परिणाम को प्रभावित करते हैं।

अगर IVF पहली बार में सफल नहीं हुआ है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। सही जांच, अनुभवी विशेषज्ञों की सलाह और बेहतर प्लानिंग के साथ अगली साइकल में सफलता की संभावना बढ़ सकती है।

Rawal Fertility Clinic में अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ हर मरीज की स्थिति को समझकर पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करते हैं, ताकि IVF सफलता की संभावना बेहतर हो सके।

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